चुनाव से एक दिन पूर्व चुनाव प्रचार प्रतिबंधित करने को दीदी ने बताया तानाशाही

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दो दिन पहले पश्चिम बंगाल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रैली में हुई चुनावी हिंसा के बाद हुई आगजनी और कार्यकर्ताओं के जरिए रोष देख कर चुनाव आयोग ने सातवें चरण के मतदान होने से पहले ही एक दिन पहले ही चुनाव प्रचार खत्म करने की घोषणा कर दी है.

वही चुनाव आयोग के इस फैसलों पर विपक्षी पार्टियों ने कड़ी आपत्ति जताई है. बीएसपी अध्यक्ष मायावती, कांग्रेस नेता अहमद पटेल, सीपीआईएम महासचिव सीताराम येचुरी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने पूछा है कि चुनाव प्रचार तय सीमा से पहले खत्म करना था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली खत्म होने तक का इंतजार क्यों किया गया?

मंगलवार को कोलकाता में अमित शाह की रैली में हिंसा और समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने के बाद तनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने तय समय से पहले ही प्रचार पर रोक लगाने की घोषणा की है. बंगाल में सातवें चरण में 19 मई को 9 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. पहले से तय नियम के मुताबिक प्रचार 17 मई की शाम को खत्म होना था. लेकिन चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक प्रचार आज रात (16 मई) 10 बजे तक ही किया जा सकता है.

उप चुनाव आयुक्त चंद्रभूषण कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में बताया, ”देश के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब आयोग को चुनावी हिंसा के मद्देनजर किसी चुनाव में निर्धारित अवधि से पहले चुनाव प्रचार प्रतिबंधित करना पड़ा हो.” चुनाव आयोग के इसी फैसले पर टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी, कांग्रेस नेता अहमद पटेल, सीपीआईएम महासचिव सीताराम येचुरी समेत कई नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है.

ममता बनर्जी का आरोप
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की ऐसी कोई समस्या नहीं है कि अनुच्छेद 324 लागू किया जाए. यह अभूतपूर्व, असंवैधानिक और अनैतिक है. यह दरअसल, मोदी और अमित शाह को उपहार है.’’ उन्होंने कहा, ”पहले कभी इस तरह का चुनाव आयोग नहीं देखा जो ‘आरएसएस के लोगों से भरा पड़ा’ है.”

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