मासूमों की दरिंदगी का हिसाब करने के लिए CJI ने दाखिल की जनहित याचिका

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हैवानियत की इंतहा बढ़ते ही कानून से इंसाफ की मांग और भी तेज हो जाती है. और इंसाफ समय पर मिल जाए तो यह मांग  के साथ कानून पर विश्वास भी  कायम हो जाता है, इसी विश्वास को और बनाए रखने के लिए  देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने देशभर में बच्चों के साथ रेप की लगातार बढ़ रही संख्या पर ठोस कार्रवाई के लिए कोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए पीआईएल रजिस्टर की.

CJI जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया में आ रही आये दिन बच्चों से बलात्कार की घटनाओं से आहत होकर सुप्रीम रजिस्ट्री से पूरे देश में पहली जनवरी से अब तक ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर और कि गई कानूनी कार्रवाई के आंकड़े तैयार करने को कहा. रजिस्ट्री ने देश के सभी हाइकोर्ट से आंकड़े मंगाए.

CJI जस्टिस रंजन गोगोई के जरिए दायर हुई याचिका के आंकड़े चौंकाने वाले थे, इन आंकड़ों के मुताबिक पहली जनवरी से 30 जून तक देशभर में बच्चों से रेप के 24 हज़ार मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इस दुर्भाग्यपूर्ण सूची में उत्तरप्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है. जबकि 9 मुकदमों के साथ नगालैंड सबसे नीचे है.

वहीं इन आंकड़ों को देख कर तो यही कहना लाजमी है कि देश में कानून की धज्जियां आम रुप उड़ाई जा रही है,   कानून को ताक पर रखकर जुर्म बढ़ रहा है बच्चों से रेप के संवेदनशील मुकदमों में भी पुलिस की लापरवाही इस कदर है कि 50 फीसद ज़्यादा यानी 1779 मुकदमों की जांच ही पूरी नहीं हो पाई है तो दरिंदगी के अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करना तो बहुत दूर की बात है. इस काली सूची में मध्यप्रदेश 2389 मामलों के साथ दूसरे नम्बर पर है लेकिन पुलिस 1841 मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है. प्रदेश की निचली अदालतों ने 247 मामलों में तो ट्रायल भी पूरा कर लिया है

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