सफलता – विफलता के दरवाजों को पहचानिए और बढ़ चलिए सफलता की ओर

सफलता – विफलता, करियर के दो पहलू है, जिसमें अगर पहला आपके साथ है तो आप अपने कदमों में पूरी ज़मीन को झूका देने की ताकत रखते है, वहीं दूसरी तरफ अगर विफलता ने आपकी चौखट पर दस्तक दे रखी है, तो फिर आप परेशानियों के एक ऐसे भवंर में घिरते चले जाते है, जहां से आपको यह नहीं पता लगता की किस दिशा में आपकी किस्मत का दरवाजा खुलेगा और आप सफलता के तख्त पर बैठेंगे. इताना तो आप और हम जानते है कि सफलता कभी भी अचानक नहीं मिलती, उसके लिए अथक परिश्रम और एक सटीक प्लानिंग की जरुरत होती है, जिसके निचले तल से लेकर ऊंचे माले तक सीढ़ियों तक चढ़ने के तरीके होते है, की किस सीढ़ी से आपको कब और कैसे सफलता मिलेगी.

जैसा की  हमारे पाठक  जानते  है कि 10 वीं  और 12 वीं की परीक्षा में  अब केवल दो महीने ही  बचे है  क्योंकि  इस  लोकसभा चुनावों के कारण परीक्षा के महीनों में बदलाव किया गया है, जिसके चलते विद्यार्थियों के पास तीन महीने से भी कम समय रह गया है, ऐसे में हर स्टूड़ेट के पास परीक्षा में अपने  आप को साबित करने के लिए चंद  समय ही शेष है, जाहिर है ऐसे में 10  वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों पर सफलता और विफलता का डर काफी हद बना हुआ है. उनके इसी डर से लड़ने के लिए हम उन्हें कुछ सकारात्मक दृष्टिकोण की बातें बताने जा रहें हैं, जिससे वह अपने ऊपर हावी हो रहे इस डर से लड़ सके.  

हमेशा याद रखें की जिंदगी में एक टारगेट को सेट करके रखना बेहद जरूरी है, बिना टारगेट के हम बहुत जल्दी ही अपना फोकस  खो बैठते हैं, बस  ही बात आपको अपने  इस डर  से लड़ने के लिए लागू करनी है, अगर आपका टारगेट सेट है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता.

तो बस अभी के लिए इतना ही, संयम और फोकस लिए हुए एक बार फिर आपको याद दिला दें कि – जिंदगी में कोई न कोई टारगेट होना जरूरी है, बिना टारगेट के जीवन रूपी नदी आपको किस दिशा में बहा कर ले जाएंगी, यह कोई नहीं बता सकता है क्योंकि अपनी लाइफ के नाविक आप ही है, कब इसे पार लगाना है, कब इसे डूबाना  है. यह आपसे बेहतर और कोई नहीं जान सकता.

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