श्रंखलाबद्ध आत्मघाती हमलों के बाद श्रीलंका में बुर्के पर प्रतिबंध

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ईस्टर के मौके पर हुए आत्मघाती बम धमाके बाद से श्रीलंका की आर्थिक सांसे थम चुकी है. जिंदगी को पुनः पटरी पर लाने के लिए श्रीलंका काफी जदोजहद कर रहा है, इसी जदोजहद में भी देश में कुछ कड़े नियम लगाए गए है, जिसमें उसने किसी भी महिला के बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

बता दें कि पहले श्रीलंका में कोई ऐसा कानून नहीं था, वह उन चंद यूरोपीय देशों से दूर था, जहां इस प्रकार के कानून थे पर आत्मघाती हमले के बाद वह  फ्रांस समेत चंद अन्य यूरोपीय देशों में शुमार हो गया है, जहां सार्वजनिक स्थानों पर मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा हुआ है.

श्रीलंका सरकार ने यह कदम ईस्टर पर हुए श्रंखलाबद्ध आत्मघाती हमलों के बाद उठाया गया है. हालांकि बम धमाकों के बाद मुसलमानों और स्थानीय लोगों में व्याप्त तनाव इस कदम से और बढ़ गया है. बुर्के पर प्रतिबंध राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने आपात शक्तियों का प्रयोग करते हुए घोषित नए नियमों के तहत लगाया है.

मालूम हो कि सुरक्षा बलों की बम धमाकों के आरोपियों पर कार्रवाई में खुद को बम से उड़ाने की घटनाओं के बाद से ही चर्चे तेज हो गए थे कि सरकार नकाब पर कुछ कड़े कदम उठा सकती है. इस कड़ी में राष्ट्रपति ने रविवार को इस नए नियम की घोषणा की थी जिसके तहत चेहरे को ढंकने वाली किसी तरह की पोशाक पहनने पर रोक लगा दी गई. इस कदम से एक हफ्ते पहले श्रीलंका के 3 चर्च और 3 आलीशान होटलों में सिलसिलेवार ढंग से किए गए धमाकों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 500 से अधिक घायल हो गए थे.

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने की महत्वपूर्ण कसौटी उसका चेहरा साफ-साफ दिखना है. इसमें कहा गया कि राष्ट्रपति ने यह फैसला शांतिपूर्ण और समन्वित समाज स्थापित करने के लिए लिया है ताकि किसी समुदाय को कोई असुविधा भी न हो और राष्ट्रीय सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके. गौरतलब है कि श्रीलंका में मुस्लिमों की आबादी 10 प्रतिशत है और वह हिंदूओं के बाद दूसरे सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं. श्रीलंका में करीब 7 प्रतिशत ईसाई हैं.

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