पति की दीर्घायु का व्रत सोमवती अमावस्या

somvati amavasya 2019 date, somvati amavasya 2019, kab hai somvati amavasya, somvati amavasya story, somvati amavasya vrat, Somvati Amavasya Mahatv, somvati amavasya vrat katha, somvati amavasya puja vidhi, somvati amavasya ke upay, Mauni Amavasya, सोमवती अमावस्या 2019 तारीख, सोमवती अमावस्या 2019, कब है सोमवती अमावस्या, सोमवती अमावस्या की कहानी, सोमवती अमावस्या व्रत, सोमवती अमावस्या का महत्व, मौनी अमावस्या,Religon News Festival

आज मौनी अमावस्या है चूंकि ये अमावस्या सोमवार के दिन पड़ी है इसीलिए इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है, सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को ही सोमवती अमावस्या कहते हैं. इस बार सोमवती अमावस्या मौनी अमावस्या के दिन है और बेहद ही दुर्लभ संयोग है.

सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है व पीपल के पेड़ के इर्द गिर्द 108 फेरिया देकर अपने सुहाग की लंबी उम्र मांगती है. सोमवती अमावस्या पर विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत भी करती हैं.
आइए आपको बताते हैं कि सोमवती अमावस्या कब है, ये कब से कब तक रहेगी, कहानी और महत्व
कहानी

सोमवती अमावस्या से सम्बंधित अनेक कथाएँ प्रचलित हैं, जिसमें एक गरीब ब्रह्मण परिवार था, जिसमे पति, पत्नी के अलावा एक पुत्री भी थी. पुत्री धीरे धीरे बड़ी होने लगी. लड़की सुन्दर, संस्कारवान एवं गुणवान भी थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था.

एक दिन ब्रह्मण के घर पर एक साधू आए ,जिन्होंने कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न होते हुए उसे लम्बी आयु का आशीर्वाद देते हुए कन्या की हथेली देखी तथा कहां कि इसके भाग्य में विवाह योग्य रेखा नहीं है. ब्राह्मण दम्पति ने साधू से इसका उपाय पूछा कि कन्या ऐसा क्या करे की उसके हाथ में विवाह योग बन जाए. साधू ने कुछ देर विचार करने के बाद कहां कि यहां से कुछ दूरी पर एक गाँव में सोना नाम की धोबी जाती की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो की बहुत ही आचार- विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है. यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिन्दूर लगा दे, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट जाएगा .साधू ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती जाती नहीं है. यह बात सुनकर ब्रह्मणि ने अपनी बेटी से धोबिन कि सेवा करने कि बात कही.

साधु की बात मान कर कन्या सुबह ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, सफाई और अन्य सारे काम करके वापस अपने घर आ जाती थी , हर दिन घर की साफ सफाई तड़के होने जाने सोना धोबिन आश्चर्यचकित थी इसी बात को जानने के लिए एक दिन सोना धोबिन निगरानी करने करने लगी कि कौन है जो तडके ही घर का सारा काम करके चला जाता है.

निगरानी के दौरान सोना ने पाया की एक कन्या मुँह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है. जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, और पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं. कन्या ने साधु की सारी सोना बताई सोना धोबिन उसे अपनी मांग का सिंदूर देने के लिए राजी हो गई , लेकिन जैसे ही सोना धोबिन ने अपनी मांग का सिन्दूर कन्या की मांग में लगाया, उसके पति मर गया. उसे इस बात का पता चल गया. वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे फेरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी. उस दिन सोमवती अमावस्या थी. ब्रह्मण के घर मिले पूए- पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भँवरी देकर पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया. ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में जान आ गई.

इसलिए यह प्रथा प्रचलित है कि इस यदि विवाहिता स्त्री बिना कुछ बोले स्नानआदि के बाद पीपल के पेड की 108 परिक्रमा करे तो उनके पति की लंबी उम्र होती है.
महिमा

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help