इसरों के रॉकेट मैन के सिवनः सरलता और सादगी की पहचान

मिशन चंद्रयान 2, चंद्रयान 2, इसरो चेयरमैन के सिवन, इसरो चीफ के सिवन, इसरो के रॉकेट मैन, Vikram Sarabhai Space Centre, mission chandrayan 2, isro chief kailasavadivoo sivan, isro chief k sivan, Chandrayan 2, bangalore/chennai News, bangalore/chennai News in Hindi, bangalore/chennai Latest News, bangalore/chennai Headlines, बेंगलुरु/चेन्नै समाचार

अथक प्रयासों के बाद सफलता जब कदम चूमती है तो हर इंसान को लगता है कि सालों की मेहनत का फल मिल गया, पर वही सफलता मिलते मिलते रह जाएं तो फिर आपको कैसा लगेगा. इस  बात को इसरों के प्रमुख के सिवन  से बेहतर कोई नहीं जान सकता. जब लैंडर विक्रम का  अनुसंधान से संपर्क टूटा तो वहीं इसरों प्रमुख सिवन की भी उम्मीदें  टूटी, क्योंकि उन्हें मालूम था कि 130 करोंड़ हिंदुस्तानी आज उन पर निगाहें लगा के इस उम्मीद से बैठे है कि कब फहरेगा हमारी कहानियों में कहे जाने वाले चंदा मामा पर देश का तिरंगा. कब हम भी उन देशों की श्रेणी में शामिल होंगे जिन्हें चांद पर पहुंचने का गौरव हासिल है. अगर भारत कल यह इतिहास रच देता तो वह  चौथे पायदान पर पहुंच जाता, जिन्हें यह मुकाम हासिल है.

चेहरे पर शिकन और बेबसी साफ दिखी

भले ही पीएम ने उनकी हौसला हफजाई की पर सिवन के चेहरे पर शिकन और बेबसी साफ दिख रही थी, संपर्क टूटने के बाद की वह कैसे कह दे 11 साल के अथक प्रयास को की वह इबारत नहीं लिख पाए. क्योंकि इसरों प्रमुख ने बड़ी कठनीईयों से इसरों में आने का रास्ता बनाया था. वह किसान के बेटे है और जानते है कि बिना सच्ची लगन के  इतिहास नहीं लिखे जा सकते. इसलिए उन्होने 11 सालों से इस दिन के लिए मेहनत की थी.

देश की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी से  ‘रॉकेट मैन’ का सफर

एक किसान परिवार से देश की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी का अब तक का  उनका काफी प्रेरणादायक  रहा है. कभी उनके पास पहनने को जूते नहीं थे. 1982 में इसरो जॉइन कर उन्होने देश और साइंस के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया. इसरों ज्वाइन करने से पहले सिवन ने जनवरी 2018 तक विक्रम साराभाई स्‍पेस सेंटर (वीएसएससी) के डायरेक्‍टर थे. क्रायोजेनिक्‍स इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और आरएलवी प्रोग्राम में उनके योगदान की वजह से उन्‍हें इसरो का ‘रॉकेट मैन’ भी कहा जाता है.

त्वरित कार्य करने पर मिली पीएम की तारीफ  

इसरो के इस  ‘रॉकेट मैन’ की आज पूरी दुनिया कायल हो रही है, क्यों कि यह वहीं इंसान है, जिसने कम लागत में चांद पर देश के कदमों को रखवाने की हिम्मत दिखाई. वह  978 करोड़ में चांद तक देश को पहुंचाना  चाहते थे, पर कहते है ना कि समय पर किसी का बस नहीं चलता. जिसकी बानगी हमने शुक्रवार देर रात देखी क्योंकि यह वही सिवन है जिन्होंने एक बार पहले भी चंद्रयान-2 की उड़ान 15 जुलाई को रोकी थी. जिसका कारण एक तकनीकी गड़बड़ी  थी, जिसकी वजह से उसे ऐन मौके पर टालना पड़ा.  इसके बाद सिवन ने फौरन एक हाई लेवल टीम गठित करके गड़बड़ी खोजी और 24 घंटों के भीतर ही उसे ठीक भी कर दिया. इसके बाद 22 जुलाई को चंद्रयान-2 धरती से रवाना हुआ. पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो प्रोग्राम ‘मन की बात’ में रेकॉर्ड समय में इस तकनीकी खामी को दूर करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों की तारीफ भी की थी.

परिवार में  पहले ग्रैजुएट

उनकी इसी सच्ची लगन के चलते वह अपने परिवार में  पहले ग्रैजुएट होने वाले  शख्‍स  बने थे. उनके भाई और दो बहनें गरीबी की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं कर सके. सिवन ने ही अपने एक साक्षात्कार में बताया था कि ‘जब वह कॉलेज में थे तो अपने पिता की खेती में मदद करते थे. इसी वजह से उन्‍हें ऐसे कॉलेज में एडमिशन दिलाया गया, जो उनके घर के पास था. जब सिवन ने बीएससी (मैथ्‍स) में 100 प्रतिशत नंबरों से पास किया तब जाकर उन्‍होंने अपना विचार बदला.

सरल और सादगी भरा जीवन

22 जुलाई से लगातार टीवी स्क्रीन पर जब से के सिवन को दिखाया जाने लगा तब से उनके बारे में लोगों ने जानना चाहा, जिसमें पता लगा कि बचपन से वह काफी सरल और सादगी से अपना जीवन जीने में यकीन रखते है जिसका उदाहरण उनके शिक्षा काल के दौरान दिखता था. उस समय उनके के पास न जूते थे न सैंडल, वह नंगे पैर ही रहते थे. कॉलेज  जाने तक उन्होने  धोती भी पहनी . उन्होने पहली बार पैंट तब पहनी जब देश के उच्च शिक्षण संस्थान एमआईटी में दाखिला लिया.

देश के प्रति समर्पण

देश को अपना जीवन समर्पित करने वाले सरल सादगी  भरे इसरों प्रमुख के सिवन को अपने मिशन चंद्रयान 2 को रास्ते से भटकता देख उन्हें बैचेनी हुई क्योंकि इस बैचेनी में उनके  मिशन के 11 साल व संस्थान में कार्यरत उनके 37 सालों का प्रयास था, उनकी इस बैचैनी को देश के 130 करोड़ हिंदुस्तानियों  के साथ  मिशन को सफल बनाने के लिए पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बड़ी करीब से महसूस किया , उनकी इस बैचेनी को समझते हुए पीएम ने कहा आप पर और आपकी पूरी टीम पर भारत को नाज है हौसला रखिए हिम्मत  रखिए इतिहास लिखने के लिए लंबी जंग लड़ी जाती है. हमने अभी नहीं लिखा इतिहास पर आने वाले समय में हम जरुर लिखेंगे क्योंकि इतनी दूरी तय करना भी मायने रखता है. जिससे हमें हमारे देश के वैज्ञानिकों के हौसलों का अनुमान हो गया. जिसके बाद पीएम ने इस किसान के बेटे को गले लगाकर उनके देश के प्रति समर्पण को सम्मान दिया.

 

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help