पुलवामा हमला: स्विच-ट्रिगर आईईडी के इस्तेमाल के साथ किया था विस्फोट

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जब भी खूफिया सुरक्षा की विफलताएं सामने लाई जाती है तो उसकी कीमत देश के साथ साथ देश में रहने वाले लोगों को भी चुकानी पड़ती है, ऐसी ही खूफिया सुरक्षा की विफलताओं की कीमत चुकाई हमने 14 फरवरी को पुलवामा में अपने 40 शहीद जवानों की जानों से, जिसके बाद से सरकार ने अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए हर उचित कदम उठाने का काम कर रही है, जिसके तहत पुलवामा में हुए सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले की जांच पड़ताल जारी है.
इस जांच पड़ताल के तहत कुछ ऐसे सबूत सामने आएं है जो पुलवामा में हुए हादसे को होने से रोक सकती थी साथ ही साथ काफिले पर हुए हमले को लेकर कई सवाल भी उठा रहीं है. इसी उठा पठक में सोमवार को बम डेटा सेंटर की एक रिपोर्ट के जरिए हुई इस बड़ी साजिश का पता चलता है.

दिलचस्प बात यह है कि अब तक जो माना जा रहा था, सच उसके विपरीत है जो विस्फोट सीआरपीएफ के जवानों की बस के लिए इस्तेमाल में लाया गया, उस विस्फोटक से भरी एसयूवी की चपेट में आने के कारण यह हादसा नहीं हुआ था, बल्कि विस्फोट करने के लिए विस्फोटकों की भारी मात्रा में एक स्विच-ट्रिगर आईईडी इस्तेमाल किया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटक की मात्रा 75-135 किलोग्राम के बीच मानी जा रही है और यह सभी आरडीएक्स नहीं है, लेकिन आग लगाने वाले विस्फोटक और आरडीएक्स के साथ मिश्रित अमोनियम नाइट्रेट मिला हुए बताया जा रहा है .माना जाता है कि हमले के पीछे एक बड़ी साजिश है. माना जाता है कि समय-समय पर विस्फोटकों को इकट्ठा किया गया, जो कि खुफिया विफलता को दर्शाता है.

बचा दें कि अब तक जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच साल में देशी बम और अन्य बम विस्फोट लगातर बढ़े हैं और 2018 में ऐसी घटनाएं 57 फीसदी बढ़ी हैं जबकि वाम चरमपंथ के क्षेत्रों और उग्रवाद प्रभावित पूर्वोत्तर में ऐसी घटनाएं घटी हैं. एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. पाकिस्तान और चीन की सीमा से सटे इस राज्य में 2014 में 37 बम (देशी बम एवं अन्य बम) धमाके, 2015 में 46 ऐसे बम धमाके, 2016 में 69 ऐसे बम धमाके, 2017 में 70 ऐसे बम धमाके और 2018 में 117 ऐसे बम धमाके हुए. एनएसजी के नेशनल बम डेटा सेंटर (एनबीडीसी) ने ये रिपोर्ट पेश की.

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