UNGA: महासभा ने भी माना पीएम मोदी का जलवा, कश्मीर की बजाए महत्वपूर्ण मुद्दों को दी भाषण में जगह

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एक देश जो विकासशील की दौड़ में आगे रहकर आपने आपको विकसित करने में जी जान लगा रहा है,  उस देश के पीएम भी अपने देश को विकसित देशों की श्रेणी में  जल्द लाने के लिए देश में हो रहे विकास कार्य को बड़ी ही खूबी के साथ इंटरनेशनल लेवल उसे प्रस्तुत कर देश की प्रगति के रास्तों को और भी शानदार ढंग से बढ़ाता है.

ऐसा ही भारत के पीएम ने शुक्रवार को UNGA की आम सभा  में करीब 17 मिनट में देश में हो रहें प्रगति कार्य को बड़े अर्थपूर्ण तरीके से अपने संबोधन में प्रस्तुत किया. पीएम ने  UNGA की 74 वीं आम सभा में हिंदी में संबोधन  करते हुए विश्व शांति, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन सरीखे विभिन्न मुद्दों का जिक्र किया. उन्होंने स्पीच के दौरान स्वामी विवेकानन्द, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर गौतम बुद्ध तक को कोट किया.

बता दें कि यूएनजीए में वक्ताओं के लिए बोलने की आदर्श समयसीमा 15-20 मिनट की रखी जाती है. पीएम ने अपने भाषण में आतंकवाद को पूरे विश्व के लिए चुनौती करार देते हुए इसके खिलाफ दुनिया से एकजुट होने का आह्वान किया और विश्व शांति के प्रति भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हमने दुनिया को ‘‘युद्ध नहीं बुद्ध’’ दिए हैं.

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को हिंदी में संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आतंक के नाम पर बंटी दुनिया उन सिद्धांतों को ठेस पहुंचाती है, जिनके आधार पर संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ. मैं समझता हूं कि आतंकवाद के खिलाफ पूरे विश्व का एकजुट होना अनिवार्य है.’’

मोदी ने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और तमिल कवि कणियन पूंगुन्ड्रनार के संदेशों को एक बार फिर विश्व पटल पर मजबूती से रखा.

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के 125 साल पहले शिकागो में धर्म संसद में दिए संदेश का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का आज भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए शांति और सौहार्द ही, एकमात्र संदेश है.’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ हम उस देश के वासी हैं जिसने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिए हैं, शांति का संदेश दिया है.’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में भारत ने सबसे ज्यादा योगदान दिया है.

मोदी ने आतंकवाद को लेकर कड़ा संदेश देते हुए कहा, ‘‘हमारी आवाज में आतंक के खिलाफ दुनिया को सतर्क करने की गंभीरता भी है, आक्रोश भी है. हम मानते हैं कि यह किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।’’

उल्लेखनीय है कि भारत ने 1996 में संयुक्त महासभा में ‘‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौते (सीसीआईटी)’’ को लेकर एक मसौदा दस्तावेज दिया था. किंतु यह एक मसौदा दस्तावेज ही बना हुआ है क्योंकि सदस्य देशों में इसे लेकर सहमति नहीं बन पायी है.

उन्होंने कहा कि 130 करोड़ भारतीयों की तरफ से संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करना गौरव की बात है.मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा का संदेश पूरे विश्व के लिए आज भी प्रासंगिक है.

उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में हम जल संरक्षण के साथ 15 करोड़ परिवारों को पाइप के जरिए पेयजल आपूर्ति से जोड़ने वाले हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम जन-भागीदारी से जन-कल्याण की दिशा में काम कर रहे हैं और यह केवल भारत ही नहीं ‘‘जग-कल्याण’’ के लिए है.

उन्होंने कहा कि एक विकासशील देश होने के बावजूद भारत स्वच्छता, स्वास्थ्य, जल संरक्षण और गरीबों के लिये आवास की सबसे बड़ी योजनाओं को कारगर तरीके से लागू करने में सफल रहा हैं. यह विश्व समुदाय के लिये संवेदनशील व्यवस्था के प्रति नया मार्ग प्रशस्त करता है और अन्य देशों में जनकल्याण के प्रति विश्वास भी पैदा करता है.

मोदी ने कहा कि वर्ष 2022 में जब भारत आजादी के 75 साल पूरे करेगा, तब गरीबों के लिये दो करोड़ घर बना लिये जायेंगे. इसी तरह विश्व ने टीबी से मुक्ति के लिये 2030 का समय तय किया है जबकि भारत ने 2025 तक ही इससे मुक्ति का लक्ष्य बनाया है.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में कहा, ‘‘ अगर इतिहास और प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के नजरिए से देखें तो ग्लोबल वार्मिंग में भारत का योगदान कम है, लेकिन समाधान के लिए कदम उठाने में भारत अग्रणी देश है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ग्लोबल वार्मिंग का दायरा बढ़ता जा रहा है, उसके नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इसी को देखते हुए भारत ने सीडीआरआई की पहल की है. दुनिया के देशों को इससे जुड़ने का निमंत्रण देता हूं. इससे प्राकृतिक आपदाओं का असर कम से कम होगा।’’

मोदी ने कहा, ‘‘सवाल ये है कि आखिर हम यह सब कैसे कर पा रहे हैं? यह बदलाव तेजी से कैसे आ रहा है? भारत हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति है, जिसकी जीवंत परपरायें है, जो वैश्विक सपनों को अपने में समेटे हुए है। हमारी संस्कृति जीव में शिव को देखती है। जन-भागीदारी से जन-कल्याण और जन-कल्याण से जग-कल्याण में यकीन रखती है’’

मोदी ने कहा कि इसी मार्ग पर चलकर भारत की प्रेरणा है ‘सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वा.’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे ही प्रयास जब अन्य देश भी करते हैं तब उनका यह विश्वास एवं संकल्प और भी मजबूत हो जाता है कि वह अपने देश का विकास और तेजी से करें.

सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान शुरू करने से कुछ दिनों पहले उन्होंने दुनिया के समक्ष अपनी सरकार की इस पहल का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, “ मैंने यहां संयुक्त राष्ट्र के भवन में प्रवेश करते हुए एक दीवार पर लिखी अपील पर गौर किया कि संयुक्त राष्ट्र से एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से मुक्त बनने को कहा गया है.”

मोदी ने कहा, “ मुझे इस महान सभा को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज जब मैं आपको संबोधित कर रहा हूं, भारत को एकल प्रयोग प्लास्टिक से मुक्त बनाने के लिए पूरे देश में एक बड़ा अभियान शुरू हो गया है.”

प्रधानमंत्री ने विश्व के विभिन्न देशों से प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान पर अंकुश लगाने के लिए भारत की पहल ‘आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन’ (सीडीआरआई) से जुड़ने का निमंत्रण भी दिया.

उन्होंने कहा कि हम अक्षय उर्जा को लेकर काम कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन को लेकर भी कदम उठाया गया है.

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