देश के 9 वें राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की पुण्यतिथि पर महामहिम ने किया पुष्प अर्पित

भारत के नवें राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की  101 वीं जयंती के उपलक्ष्य में सोमवार को देश के महामहिम रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा को उनकी जयंती  के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

इस मौके पर  मौजूद डॉ. शंकर दयाल शर्मा के पारिवारिक सदस्यों और राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें याद किया.

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जन्म मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुआ था इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा  आगरा के सेंट जॉन्स कॉलेज , आगरा कॉलेज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, फित्ज़विल्यम कॉलेज, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, लिंकोन इन् तथा हारवर्ड ला स्कूल से शिक्षा प्राप्त की. इन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत साहित्य में एम.ए. की डिग्री विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान के साथ प्राप्त की, आपने एल.एल.एम. की डिग्री भी लखनऊ विश्व विद्यालय से प्रथम स्थान के साथ प्राप्त की थी, विधि में पी.एच.डी. की डिग्री कैम्ब्रिज से प्राप्त की.

डॉ. शंकर दयाल शर्मा के राजनैतिक सफर की शुरुआत 1940 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम से शुरु हुई. स्वतंत्रता आन्दोलन में शामिल होने के चलते उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता  ग्रहण की थी . तथा आजादी के बाद 1952 में भोपाल के मुख्यमंत्री  भी बने, इस पद पर वह 1956 तक रहे जब भोपाल का विलय अन्य राज्यों में कर मध्यप्रदेश की  राज्य बना .

मुख्यमंत्री से राष्ट्रपति तक का सफर

1960 के दशक में उन्होंने इंदिरा गांधी को कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करने में अपना योगदान दिया था ,जिसके चलते उन्हें इंदिरा कैबिनेट में संचार मंत्री (1974-1977) रहे, 1971 तथा 1980 में उन्होंने भोपाल से लोक सभा की सीट जीती, इसके बाद उन्होंने कई भूष्नात्मक पदों पर कार्य किया. 1984 से वे राज्यपाल के रूप में आंध्र प्रदेश में नियुक्ति के दौरान दिल्ली में उनकी पुत्री गीतांजली तथा दामाद ललित माकन की हत्या सिख चरमपंथियों ने कर दी, 1985 से 1986 तक वे पंजाब के राज्यपाल रहे, अन्तिम राज्यपाल दायित्व उन्होंने 1986 से 1987 तक महाराष्ट्र में निभाया. इसके बाद उन्हें उप राष्ट्रपति तथा राज्य सभा के सभापति के रूप में चुन लिया गया. व बाद में  इस पद पर वे1992 में राष्ट्रपति बनने तक रहे.

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