छ: रूप के तिलों के दान का पर्व षटतिला एकादशी

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हिंदू धर्म में माघ महीना बहुत पवित्र माना जाता है. इस माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है. पद्म पुराण में षटतिला एकादशी का बहुत महिमा है. माघ महीने में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है.

पद्म पुराण में षटतिला एकादशी का बहुत महात्मय बताया गया है इस दिन श्रद्धालु उपवास करके दान, तर्पण और विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है. अपने नाम के अनुरूप यह व्रत तिलों से जुड़ा हुआ है. पूजा में तिल का विशेष महत्व होता है. षटतिला एकादशी के दिन तिल का 6 तरह से प्रयोग करने पर पापों का नाश हो जाता है और बैकुंठ की प्राप्ति होती है.

क्या है षटतिला एकादशी की महिमा पद्मपुराण के अनुसार एक बार नारद मुनि त्रिलोक भ्रमण करते हुए भगवान विष्णु के धाम वैकुण्ठ पहुंचे. वहां पहुंच कर उन्होंने वैकुण्ठ पति को प्रणाम करके उनसे अपनी एक जिज्ञासा व्यक्त की और प्रश्न किया कि प्रभु षट्तिला एकादशी की क्या कथा है और इस एकादशी को करने से कैसा पुण्य मिलता है. इस के उत्तर में श्री विष्णु ने एक कहानी सुनाते हुए कहा कि प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ब्राह्मणी रहती थी. ब्राह्मणी उनमे बहुत ही श्रद्धा एवं भक्ति रखती थी. यह स्त्री सभी व्रत रखती थी. एक बार उसने एक महीने तक व्रत रखकर विष्णु जी की आराधना की जिसके प्रभाव से उसका शरीर तो शुद्ध हो गया परंतु वह कभी ब्राह्मण एवं देवताओं के निमित्त अन्न दान नहीं करती थी अत: भगवान ने निर्णय किया वह बैकुण्ठ में रहकर भी अतृप्त रहेगी अत: वे स्वयं एक दिन भिक्षा लेने पहुंच गए.

उन्होंने जब स्त्री से भिक्षा मांगी तो उसने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर भगवान के हाथों पर रख दिया, वे वह पिण्ड लेकर अपने धाम लौट आए. कुछ दिनों पश्चात वह स्त्री भी देह त्याग कर स्वर्ग लोक में आ गयी. यहां आकर उसे एक कुटिया और आम का पेड़ मिला. खाली कुटिया देखकर वह घबराकर भगवान के पास आई और बोली की उसने पूरी धर्मपरायणता से भक्ति की फिर उसे खाली कुटिया क्यों मिली है. तब भगवान ने उसे बताया कि यह अन्नदान नहीं करने तथा मिट्टी का पिण्ड देने से हुआ है.

क्या है दान का महत्व
जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है और तिल एवं अन्न दान करता है उसे मुक्ति और वैभव की प्राप्ति होती है.

क्या तिलों के दान का महत्व
शास्त्रों के अनुसार इस व्रत में तिल को छ: रूप में दान करना उत्तम फलदायी माना जाता है. उन्होंने जिन 6 प्रकार के तिल के दान की बात कही है वह इस प्रकार हैं 1. तिल मिश्रित जल से स्नान 2. तिल का उबटन 3. तिल का तिलक 4. तिल मिश्रित जल का सेवन 5. तिल का भोजन 6. तिल से हवन.
इन चीजों का स्वयं भी प्रयोग करें और दान में भी दें.

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