चीन की शरण न मिले तो कल मसूद अजहर अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित हो सकता है

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14 फरवरी को देश को आतंकी हमले का ना भूलने वाला घाव देने वाले जैश-ए-मुहम्मद  के मुखिया मसूद अजहर के लिए यह खबर नींद से जागने की हो सकती है, भारत के स्वर्ग पर हमला करने के बाद अपनी विजय का जश्न मना रहा इस कुख्यात आतंकी के लिए बुधवार का दिन काला दिवस बन सकता है.

अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी (Global terrorist) घोषित किया जा सकता है. खबरों के मुताबिक 1 मई को चीन संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने को लेकर अपना रुख बदल सकता है.

यदि ऐसा हो जाता है तो यह वर्तमान सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत हो सकती है क्योंकि 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए दुनिया भर के देशों का समर्थन भारत सरकार को मिला था. परंतु चीन के हर बार अडंगे के कारण वह इस सूची में शामिल होने से बच निकलता है.

इस बार दिलचस्प बात यह है कि अपनी आर्थिक हालातों के हाथों मजबूर पाकिस्तान भी आखिरकार मसूद पर प्रतिबंध लगाने को राजी हो गया है. लेकिन साथ ही उसने एक शर्त भी रख दी है. कि मसूद अजहर को वैश्विक आतंकियों की सूची में डालने से कोई दिक्कत नहीं है, बशर्ते इसका आधार पुलवामा हमला न हो.

फैसल ने कहा कि पहले भारत को इस बात का सुबूत देना होगा कि पुलवामा हमले से मसूद अजहर का कोई संबंध है. इसके बाद ही हम उसको प्रतिबंधित करने के बारे में बात कर सकते हैं. पुलवामा हमला एक अलग मुद्दा है.

बता दें कि सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत अजहर को सूचीबद्ध करने के फ्रांस के प्रस्ताव पर चीन के अड़ंगा लगाने के 2 हफ्ते बाद अमेरिका ने 27 मार्च को एक बड़ा कदम उठाया. अमेरिका ने अजहर को ब्लैकलिस्ट करने, उस पर यात्रा प्रतिबंध लगाने, उसकी संपत्ति की खरीद-बिक्री पर रोक और हथियार रखने पर रोक लगाने के लिए 15 देशों के शक्तिशाली परिषद में ड्राफ्ट पेश किया था.

पिछले महीने, चीन ने चौथी बार अजहर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया था. अजहर भारत में 14 फरवरी को हुए पुलवामा आत्मघाती हमले समेत कई हमले में वांछित है. चीन भारत, अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य देशों के इस आग्रह को लगातार ठुकराता रहा है.

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