चुनावी दंगल में उम्मीदवारों के लिए आपराधिक रिकॉर्ड दिखाना होगा जरुरीः चुनाव आयोग

राजनीति के दाव पेंच सीखना आसान नहीं है, इस सियासी घेरे में जो एक बार आ गया, वह या तो इसके दांव पेंच सीखने के लिए ऐड़ी- चोटी का जोर लगा देता है या फिर साम, दाम, दंड, भेद के पासों के साथ खेलकर सियासी राह में आने वाले सियासतदारों को उन्हीं के खेल में शंतरंज की चाल चलकर मात दें.

पर कहते है सियासी गलियारों में गर्माहट का महौल चुनाव से पहले सत्ता में आने के समय या फिर चुनाव के बाद सत्ता के गलियारों में अपनी बादशाहत को काबिज़ करने के लिए देखा जाता है. पर राजनीतिक पार्टीयों के लिए अक्सर चुनाव चाहे वों विधनसभा के हो या फिर लोकसभा के गले की हड्डी बनते देखा गया है, क्योंकि चुनावों का समीकरण कोई नहीं जानता, ना आप और मैं भी नहीं. कोई नहीं बता सकता कि चुनाव का ऊंठ किस करवट जा के बैठेंगा.

इन्ही समीकरणों और चुनाव की तारीखों के पास आने पर चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के लिए अपने आपराधिक रिकॉर्ड को कम से कम तीन बार अख़बार तथा टीवी पर विज्ञापित करना अनिवार्य कर दिया है.

इस संबंध में निर्देश 10 अक्टूबर 2018 को जारी किए गए थे, लेकिन 11 अप्रैल से 19 मई तक होने वाले इस लोकसभा चुनाव में पहली बार इस नियम का इस्तेमाल किया जाएगा. चुनाव परिणाम 23 मई को घोषित किए जाएंगे.
चुनाव आयोग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को भी अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड का विज्ञापन देना होगा.

इसका मतलब है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और पार्टियों को प्रचार अवधि के दौरान व्यापक रूप से प्रसारित समाचार पत्रों तथा लोकप्रिय टीवी चैनलों में कम से कम तीन अलग-अलग तारीख़ों पर अपने आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करना होगा.

जिन उम्मीदवारों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें इस बात का उल्लेख करना होगा. उम्मीदवारों को अब एक संशोधित फॉर्म (संख्या 26) भरना होगा.

उम्मीदवारों को संबंधित दलों को यह बताना होगा कि कितने मामलों में उनके ख़िलाफ़ आरोप दर्ज हुए हैं और कितने मामले लंबित हैं. इसके अलावा उनकी पार्टियों को अपने उम्मीदवारों के बारे में अपनी वेबसाइट पर जानकारी देना अनिवार्य होगा.
इस नियम का पालन करने में विफल रहने वाले दलों पर मान्यता ख़त्म होने या निलंबित होने का ख़तरा रहेगा.

निर्देशों के अनुसार, उम्मीदवारों अख़बारों में प्रकाशित अपने दावे की क्लिपिंग भी जमा करनी होगी और हर राज्य के सभी दलों को ऐसे उम्मीदवारों की संख्या बतानी होगी, जिनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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