केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को है उपराष्ट्रपति से शिकायत

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देश के उपराष्ट्रपति की किताब के विमोचन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को चेन्नई में कहा कि उन्हें उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से एक ‘‘छोटी सी शिकायत’’ है कि वह (नायडू) सत्ता पक्ष के लोगों से कुछ ज्यादा सख्ती से पेश आते हैं.

उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति के रूप में नायडू के दो साल के (अब तक के) कार्यकाल पर आधारित उनकी पुस्तक ‘लिस्निंग, लर्निंग एंड लीडिंग’ का विमोचन चेन्नई में किया गया. जहां  गृहमंत्री अमित शाह समेत देश की सभी सम्माननीय हस्तियां तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा तमिलनाडु के मुख्य मंत्री ऐडापाड्डि के.पलनिसमी सहित कई मौजूद थी.

शाह ने सभी गणमान्य हस्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें नायडू से ‘‘एक छोटी सी शिकायत’’ है कि वह (नायडू) सत्तापक्ष के लोगों से (राज्य सभा में) कुछ ज्यादा सख्ती से पेश आते हैं और हर मंत्री (उच्च सदन में) उनसे डरते हैं.

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि कहा कि उनका दृढ़ता से यह मानना था कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए क्योंकि इससे देश को कोई फायदा नहीं था.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं दृढ़ था कि अनुच्छेद 370 हटाया जाना चाहिए…अनुच्छेद 370 हटाने के बाद कश्मीर में आतंकवाद खत्म होगा और वह विकास के पथ पर अग्रसर होगा.

अपने कार्यकाल के दो साल सफलता से पूरे होने पर लॉन्च होने वाली किताब के विमोचन अवसर पर नायडू ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुस्तक के जरिए उन्होँने अपने अनुभव साझा किये हैं ताकि लोग इससे लाभान्वित हो सकें.

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नायडु ने यह भी कहा कि मैंने कभी उपराष्ट्रपति बनना नहीं चाहा  क्योंकि मुझे लगा कि उपराष्ट्रपति बनने के बाद लोगों के साथ संवाद करना मुश्किल है, मैं पार्टी ऑफिस नहीं जा पाऊंगा और अपने कार्यकर्ताओं से नहीं मिल पाऊंगा इस बात की चिंता भी मुझे थी.

इसके साथ ही वेंकैया नायडु का कहना था कि पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया है, पार्टी ही मेरा जीवन है और हर समय पार्टी के बारे में सोचता हूं लेकिन जिस दिन से उपराष्ट्रपति बनाया गया उसके बाद से मैंने राजनीति नहीं की.

अपने दो वर्ष के सफलता पूर्वक पूरे हुए कार्यकाल के कार्यक्रम में उन्होने पीएम मोदी को भी श्रेय देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कारण भारत की पहचान बढ़ी है और पूरी दुनिया में  देश को सम्मान प्राप्त हो रहा है.

उन्होँने ने कहा की मेरे जैसा व्यक्ति जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के आने पर तांगे पर बैठकर गली-गली में सूचना देता था, और दीवारों पर पार्टी के बारे लिखता था उसे सत्ता पार्टी का मुखिया बनाया जायेगा, यह मैंने कभी सोचा भी नहीं था. उसके बाद विभिन्न पदों पर काम करने का मौका मिला.

इसके अलावा देश में हो रही भाषाई विभिन्नता पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भाषा का विरोध नहीं होना चाहिये किंतु किसी भाषा को जबरन किसी पर थोपना भी नहीं चाहिये, अपनी मातृभाषा को प्राथमिकता देना चाहिये.

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