देश की आस को मिला बल, आर्बिटर ने भेजी विक्रम लैंडर की तस्वीरें

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11 साल की कड़ी मेहनत को लेकर इसरों अपने चंद्रयान 2 मिशन के लिए काफी उत्साहित था, पर यह उत्साह तब कम पड़ गया जब  7 सितंबर को देर रात 1.51 बजे लैंडर विक्रम अपनी कक्षा से अलग होकर अनुसंधान से संपर्क खो  बैठा था, जिसके बाद से विक्रम से संपर्क साधने के कड़े प्रयास जारी थे क्योंकि इसरो प्रमुख ने खुद बताया देश के 14 दिन इस मिशन को लेकर काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन 14 दिनों में वह आर्बिटर से भेजे जा रहे आकंडों व संपर्क टूटने से पहले विक्रम के भेजे गए आकंडों का विश्लेषण करेंगे. जिसके बाद वह इस मिशन को हर संभव सफल बनाने के लिए पेरालोटोप मिशन चलाए.

विक्रम लैंडर से संपर्क टूटे कुछ घड़ियां ही बीती थी कि आर्बिटर के इन्फ्ररेड कैमरों के जरिए भेजी गई तस्वीर से लैंडर का पता लगा. पर अभी वह किस हालात में यह पता लगाना बाकी है. इसी बाबत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने रविवार को कहा कि चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ के चंद्रमा की सतह पर होने का पता चला है और लैंडर ने निश्चित ही ‘हार्ड लैंडिंग’ की है. इसी के साथ सिवन ने स्वीकार कर लिया कि नियोजित ‘सॉफ्ट लैंडिंग” सफल नहीं रही. उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में लगे कैमरों ने लैंडर विक्रम की मौजूदगी का पता लगाया और रोवर ‘प्रज्ञान’ उसके भीतर ही मौजूद है.

‘हार्ड लैंडिंग’ की वजह से उसे नुकसान पहुंचने के सवाल पर सिवन ने कहा, ‘‘हमें इस बारे में अभी कुछ नहीं पता.’’ उन्होंने कहा कि ‘विक्रम’ मॉड्यूल से संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।

गौरतलब है कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के जरिए चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का अभियान शनिवार को अपनी तय योजना के मुताबिक पूरा नहीं हो पाया था और चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर उसका संपर्क जमीनी स्टेशन से टूट गया था।

चंद्रमा पर खोज के लिए देश के दूसरे मिशन का सबसे जटिल चरण माने जाने के दौरान लैंडर चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के बिलकुल करीब था जब इससे संपर्क टूट गया।

 

 

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