बंगाल में ममता सरकार के खिलाफ डॉक्टर्स की हड़ताल जारी, मांगे माने जाने पर ही खत्म करेंगे हड़ताल

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भगवान के बाद आपकी जिंदगी की डोर डॉक्टर्स के हाथों में होती है, पर ये डोर सही सलामत रहे इसका ख्याल सरकार को भी रखना होगा. अस्पतालों में आए मरीजों के साथ परिजन मरीज की तबीयत बिगड़ने का सारा ठीकरा डॉक्टर्स पर फोड़ते है. उनके साथ बदसलूकी के साथ साथ उनकी बेरहमी से पिटाई करने से भी हिचकिचाते नहीं है. ऐसा ही एक मामला चार दिन पहले पश्चिम बंगाल के एसकेएम  ह़स्पिटल में हुआ, जहां मरीज के इलाज में लापरवाही का इल्जाम लगाते हुए दो डॉक्टर्स को मरीज के परिजनों ने बुरी तरह पीटा , जिसके बाद से उन दोनों चिकित्सकों की हालत गंभीर बनी हुई है,

तभी से बंगाल में पिछले चार दिनों से डॉक्टर्स अस्पताल परिसर में उचित सुरक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर हड़ताल पर है, जिसको लेकर देश भर में भी गुस्सा हर राज्यों में  देखने को मिल रहा है, कही सांकेतिक प्रोटेस्ट से तो कही हड़ताल के रुप में, ऐसे में बंगाल की चिकित्सकीय व्यवस्था काफी चरमरा गई है, जिसपर राज्य. सरकार टस से मस नहीं हो रही, व अपनी सुरक्षा को लेकर डॉक्टर्स भी काफी सजग है, जिसके परिणाम स्वरुरप राज्य सरकार की तरफ से सुरक्षा के खोखले आशवासनों के परिणाम स्वरुरप उन्होनें इस्तीफे देने शुरु कर दिए है, जिसपर ममता सरकार ने उनपर कड़ी करवाई की बात के साथ अंजाम भुगतने की धमकी तक दे डाली है,

वही डॉक्टर्स भी अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सजग होने के साथ हड़ताल को फिलहाल खत्म करने के मूड में नहीं है, दो डॉक्टरों की पिटाई से नाराज़ हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने दीदी की मीटिंग के ऑफर को भी ठुकरा दिया है. साथ ही डॉक्टर इस बात पर अड़ गए हैं कि जब तक ममता बिना शर्त माफी नहीं मांगती और दोषियों पर एक्शन का भरोसा नहीं देतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी.

इसी बीच दिल्ली के एम्स के डॉक्टर्स आज से काम पर लौट आए है, जिसपर उनका मानना है कि इससे मरीजों का काफी नुकसान है, पर वह सांकेतिक प्रोटेस्ट को जारी रखेंगे व आज शाम एम्स परिसर में कैडल मार्च निकालकर ममता सरकार का विरोध करेंगे .

वहीं इस पूरे मामले पर ममता बनर्जी का रवैया भी हैरान करने वाला है. बता दें कि ममता ने एनआरएस अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों को मिलने बुलाया था लेकिन उन्होंने मीटिंग से मना कर दिया है. डॉक्टरों के मुताबिक़ हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक ममता बिना शर्त माफी नहीं मांग लेतीं. उन्होंने हड़ताल ख़त्म करने के लिए सरकार के सामने 6 शर्तें भी रख दी हैं.

वही बिगड़ते हालातों की जानकारी लेने के लिए  बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने खुद ममता को फोन किया लेकिन ममता ने ना फोन उठाया और ना ही कोई जवाब दिया. गवर्नर ऑफिस से मुख्यमंत्री दफ्तर संदेश तक पहुंचाया गया कि राज्यपाल मिलना चाहते हैं लेकिन अब भी ममता की ओर से कोई रिस्पॉन्स नहीं है.

स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी कई बार फोन करके ममता से बात करने की कोशिश की लेकिन ममता ने बात नहीं की. इसके बाद केंद्र सरकार को ममता को चिट्ठी लिखकर अपील करनी पड़ी कि वो खुद पहल कर हड़ताल को खत्म करवाने की कोशिश करें.

इन सबके बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी ममता सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि डॉक्टरों से गतिरोध खत्म करने के लिए क्या कदम उठाए हैं. डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अब तक ममता सरकार ने क्या किया है. इसका जवाब सात दिनों में सरकार को देना है लेकिन ऐसे हालातों में भी ममता अलग ही राग अलाप रही हैं.

जिस वक्त उनकी पहली और आखिरी प्राथमिकता बंगाल में हालात संभालने की होनी चाहिए थी, उस वक्त वो कह रही हैं कि बंगाल में रहना है तो बांग्ला बोलना ज़रूरी है. हैरानी की बात है कि बंगाल में अब तक 600 से ज्यादा डॉक्टर्स इस्तीफा दे चुके हैं. बड़े शहरों में सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर्स हड़ताल पर है, प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन ममता बिगड़े हालात संभालने में अब तक नाकाम है और आगे भी यही तस्वीर रही तो हालात और बदतर होने वाले हैं.

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