चीन में स्वायत राज्य हांगकांग में नए प्रत्यर्पण कानून के विरोध में हो रहे है प्रदर्शन

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चीन के स्वायत राज्य हांगकांग में नए प्रत्यर्पण कानून के विरोध में हो रहा प्रदर्शन बुधवार को हिंसक हो गया. प्रदर्शनकारियों ने पूरे शहर के साथ ही यहां की विधान परिषद को भी घेर लिया. इसके बाद पुलिस की कार्रवाई में कई पत्रकार, कारोबारी और मानवाधिकार समर्थक घायल हुए हैं.

बुधवार को हुए प्रदर्शन ने दुनिया भर का ध्यान इसलिए भी खींचा क्योंकि करीब दस लाख लोग चीनी सरकार के विरोध में सड़कों पर थे. हांगकांग में इतने बड़े प्रदर्शन को देखते हुए यह सवाल उठता है कि आखिर नए प्रत्यर्पण कानून में ऐसा क्या है जिसके चलते ऐसा हो रहा है.

प्रत्यर्पण कानून में क्या बदलाव हो रहा है?

हांगकांग के मौजूदा प्रत्यर्पण कानून में दुनिया के कई देशों के साथ कोई समझौता नहीं है. इसके चलते अगर कोई व्यक्ति अपराध कर हांगकांग आ जाता है तो उसे कई देशों में प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता. चीन भी ऐसे देशों में शामिल है. लेकिन, अब हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन कर रही है. इसके बाद लोगों को चीन, ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकेगा.

मौजूदा समय में हांगकांग की ब्रिटेन, अमेरिका और सिंगापुर सहित 20 देशों के साथ द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधियां हैं. लेकिन कानून के जानकारों के मुताबिक अब हांगकांग की सरकार प्रत्यर्पण कानून में जो बदलाव कर रही है, उसके तहत वह संदिग्ध अपराधियों को उन देशों में भेजने की भी इजाजत देगी जिनके साथ उसकी कोई संधि नहीं है.

इसके अलावा किसी भी देश द्वारा किसी आरोपित को सौंपने की अर्जी को स्वीकार करने का अधिकार केवल हांगकांग सरकार की मुखिया (प्रमुख कार्यकारी) को ही होगा. अर्जी को खारिज या स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया में हांगकांग की 70 सदस्यीय विधान परिषद का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा.

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