समृति शेषः साहित्य में एक युग का अंत हो चला

Namvar Singh passed away, Hindi literary critic passed away, AIIMS Trauma Centre

हिंदी साहित्य के प्रेमियों के लिए साहित्य की दुनिया से एक बुरी खबर है. आधुनिक काल के धाकड़ लेखक और आलोचक साहित्य अकेडमी पुरस्कार के पुरोधा नामवर सिंह नहीं रहे. नामवर सिंह(93) का निधन मंगलवार रात 11:51 पर दिल्ली के एम्स में हुआ.

बता दें कि पिछले महीने अपने कमरे में गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी जिसके बाद से उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था. तथा कल रात 11.51 पर उन्होंने आखिरी सांस ली.

गंगा के तट पर पैदा होने के कारण बनारसी लहजा उनकी वाणी और साहित्य में हमेशा छलकता रहा है. नामवर सिंह की पैदाइश बनारस के पास जीयनपुर गांव की है. तारीख 28 जुलाई 1927 की. बाकी सारी पढ़ाई लिखाई बनारस में ही हुई. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी. वो भी आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अंडर में. पीएचडी कंप्लीट करने के बाद वहीं पढ़ाने लगे. वहां विवाद हुआ तो बीएचयू छोड़ दिया. सागर और जोधपुर यूनिवर्सिटी होते हुए दिल्ली की जवाहरलाल यूनिवर्सिटी पहुंचे. यहां आकर हिंदी विभाग का जो कायाकल्प किया वो देश में कहीं और कभी नहीं हुआ था. यहां भारतीय भाषा केंद्र की स्थापना की. सन 1992 में जेएनयू से रिटायर हो गए.

नामवर जी के आकस्मिक मृत्यु पर पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर विधमान हो गई है मानों ऐसा प्रतीत होता है कि साहित्य में एक युग का अंत हो चला है, क्योंकि नामवर सिंह का मानना था कि नई पीढ़ी के लेखको की लेखनी में वो धार नहीं है ,जो साहित्य के सृजन को एक नया आयाम दे सके.

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