हिंदी दिवसः लोगों को भी हिंदी की बिंदी का अर्थ समझ आने लगा है

निज भाषा उन्नति सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल। भाषा, दो शब्दों के मेल से बना यह शब्द इतना भारी और वजनी है कि वह इंसान को एक दूसरे से जान पहचान करवाने में सक्षम होता है , बिना इसके एक दूसरे वार्तालाप ,बातचीत मुमकिन ही नहीं. इसकी कारण हमें एक दूसरे से संपर्क करना आसान होता है. उपरोक्त भारतेंदु हरिशचंद्र की निज भाषा कविता से ली गई लाइने आज के समय में हिंदी भाषा की स्थिति को बड़े ही सुंदर ढंग से बयान कर रहीं है. वर्तमान समय में हिन्दी पूरे विश्व के आकर्षण का केन्द्र बनती जा रही है. विश्व के लगभग 140 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में हिन्दी को पढ़ाया जाता है. जिससे हिंदी के भविष्य पर लटका खतरा अब धूमिल दिखता है. आज बाजार में अपना पांव पसारे कई टी0वी0 चैनलों को लगने लगा है कि हमें अगर भारत में लोकप्रियता अर्जित करनी है और पैसा कमाना है तो यह हिन्दी के बिना संभव नहीं. क्योंकि शहरों और गांवों में आज भी कई इंसान ऐसे है जो हिंदी ही समझते है. जिसके कारण टीवी पर प्रसारित होने वाले चैनलों में आधी से ज्यादा संख्या हिंदी की है. उल्लेखनीय है कि डिस्कवरी, नेशनल ज्योग्राफिकल चैनल एवं बच्चों के लोकप्रिय चैनल पोगो को व खेल में रुचि रखने वाले खेलप्रेमियों के लिए स्टार स्पोर्ट अपने दर्शकों की तादाद में बढ़ोतरी करने के लिए हिंदी का स्टार स्पोर्ट हिंदी चैनल लेकर आएं है. इस तरह की गतिविधियां जब भाषाई स्तर कों उठाने के लिए देखने को मिलती है तो लगता है, कि हिंदी को दोयम समझने वालों को भी अब हिंदी पर लगी बिंदी का अर्थ समझ आ गया है, हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस में G7 में हिस्सा लेने के लिए जब पहुंचे थे तो वहां उनकी मुलाकात अपने अमेरिकी दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प से की. ट्रम्प से हुई पीएम की इस मुलाकात में पीएम ने पूरी बातचीत हिंदी में की जब एक देश का नेता ग्लोबल लेवल पर हिंदी भाषा को इस तरह से पहचान दिलाता है तो उसकी अहमियत और भी बेहतर दंग से सबको समझ आती है, पीएम में अपनी मुलाकात में उन्होने अंग्रेजी को भी अहमियत दी पर अपनी मात्र भाषा को उन्होंने सबसे ऊपर प्राथमिकता दी. पर इतना अपना पन पाने के बाद भी आज हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा बनने के स्तर को छू भी नहीं पाई, वह केवल राज काज की भाषा बनकर ही रह गई है , सरकारी मंत्रालयों, स्कूलों व कॉलेजों आदि में इसके प्रोत्साहन के लिए बस हिंदी सप्ताह मना लिया जाता है, पर जब राष्ट्र भाषा का गौरव बनने की बात आती है. देश की आवाज में एक सुर की कमी छलक जाती है, और हिंदी फिर टक टकी लगाएं हास्यास्पद सी खडी रहती है. अगर हमे हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाना हैं तो पूरे हिन्दुस्तान को एक होकर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए राजी होना होगा जिससे उससे संविधान में यह स्थान मिल जाएं. तो चलिए आज एक लहर की शुरुआत करें अपनी मातृभाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए. जय हिन्द जय हिंदी.निज भाषा उन्नति सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल। भाषा, दो शब्दों के मेल से बना यह शब्द इतना भारी और वजनी है कि वह इंसान को एक दूसरे से जान पहचान करवाने में सक्षम होता है , बिना इसके एक दूसरे वार्तालाप ,बातचीत मुमकिन ही नहीं. इसकी कारण हमें एक दूसरे से संपर्क करना आसान होता है. उपरोक्त भारतेंदु हरिशचंद्र की निज भाषा कविता से ली गई लाइने आज के समय में हिंदी भाषा की स्थिति को बड़े ही सुंदर ढंग से बयान कर रहीं है. वर्तमान समय में हिन्दी पूरे विश्व के आकर्षण का केन्द्र बनती जा रही है. विश्व के लगभग 140 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में हिन्दी को पढ़ाया जाता है. जिससे हिंदी के भविष्य पर लटका खतरा अब धूमिल दिखता है. आज बाजार में अपना पांव पसारे कई टी0वी0 चैनलों को लगने लगा है कि हमें अगर भारत में लोकप्रियता अर्जित करनी है और पैसा कमाना है तो यह हिन्दी के बिना संभव नहीं. क्योंकि शहरों और गांवों में आज भी कई इंसान ऐसे है जो हिंदी ही समझते है. जिसके कारण टीवी पर प्रसारित होने वाले चैनलों में आधी से ज्यादा संख्या हिंदी की है. उल्लेखनीय है कि डिस्कवरी, नेशनल ज्योग्राफिकल चैनल एवं बच्चों के लोकप्रिय चैनल पोगो को व खेल में रुचि रखने वाले खेलप्रेमियों के लिए स्टार स्पोर्ट अपने दर्शकों की तादाद में बढ़ोतरी करने के लिए हिंदी का स्टार स्पोर्ट हिंदी चैनल लेकर आएं है. इस तरह की गतिविधियां जब भाषाई स्तर कों उठाने के लिए देखने को मिलती है तो लगता है, कि हिंदी को दोयम समझने वालों को भी अब हिंदी पर लगी बिंदी का अर्थ समझ आ गया है, हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस में G7 में हिस्सा लेने के लिए जब पहुंचे थे तो वहां उनकी मुलाकात अपने अमेरिकी दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प से की. ट्रम्प से हुई पीएम की इस मुलाकात में पीएम ने पूरी बातचीत हिंदी में की जब एक देश का नेता ग्लोबल लेवल पर हिंदी भाषा को इस तरह से पहचान दिलाता है तो उसकी अहमियत और भी बेहतर दंग से सबको समझ आती है, पीएम में अपनी मुलाकात में उन्होने अंग्रेजी को भी अहमियत दी पर अपनी मात्र भाषा को उन्होंने सबसे ऊपर प्राथमिकता दी. पर इतना अपना पन पाने के बाद भी आज हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा बनने के स्तर को छू भी नहीं पाई, वह केवल राज काज की भाषा बनकर ही रह गई है , सरकारी मंत्रालयों, स्कूलों व कॉलेजों आदि में इसके प्रोत्साहन के लिए बस हिंदी सप्ताह मना लिया जाता है, पर जब राष्ट्र भाषा का गौरव बनने की बात आती है. देश की आवाज में एक सुर की कमी छलक जाती है, और हिंदी फिर टक टकी लगाएं हास्यास्पद सी खडी रहती है. अगर हमे हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाना हैं तो पूरे हिन्दुस्तान को एक होकर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए राजी होना होगा जिससे उससे संविधान में यह स्थान मिल जाएं. तो चलिए आज एक लहर की शुरुआत करें अपनी मातृभाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए. जय हिन्द जय हिंदी.

निज भाषा उन्नति सब उन्नति को मूल।

बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।

भाषा, दो शब्दों के मेल से बना यह शब्द इतना भारी और वजनी है कि वह इंसान को एक दूसरे से जान पहचान करवाने में सक्षम होता है , बिना इसके एक दूसरे वार्तालाप ,बातचीत मुमकिन ही नहीं. इसकी कारण हमें एक दूसरे से संपर्क करना आसान होता है.

उपरोक्त भारतेंदु हरिशचंद्र की निज भाषा कविता से ली गई लाइने आज के समय में हिंदी भाषा की स्थिति को बड़े ही सुंदर ढंग से बयान कर रहीं है. वर्तमान समय में हिन्दी पूरे विश्व के आकर्षण का केन्द्र बनती जा रही है. विश्व के लगभग 140 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में हिन्दी को पढ़ाया जाता है.  जिससे हिंदी के भविष्य पर लटका खतरा अब धूमिल दिखता है.

आज बाजार में अपना पांव पसारे कई टी0वी0 चैनलों को लगने लगा है कि हमें अगर भारत में लोकप्रियता अर्जित करनी है और पैसा कमाना है तो यह हिन्दी के बिना संभव नहीं. क्योंकि शहरों और गांवों में आज भी कई इंसान ऐसे है जो हिंदी ही समझते है. जिसके कारण टीवी पर प्रसारित होने वाले चैनलों में आधी से ज्यादा संख्या हिंदी की है.

उल्लेखनीय है कि डिस्कवरी, नेशनल ज्योग्राफिकल चैनल एवं बच्चों के लोकप्रिय चैनल पोगो को व खेल में रुचि रखने वाले खेलप्रेमियों के लिए स्टार स्पोर्ट अपने दर्शकों  की तादाद में बढ़ोतरी करने के लिए हिंदी का स्टार स्पोर्ट हिंदी चैनल लेकर आएं है.

इस तरह की गतिविधियां जब भाषाई स्तर कों उठाने के  लिए देखने को  मिलती है तो लगता है, कि हिंदी को दोयम समझने वालों को भी अब हिंदी पर लगी बिंदी का अर्थ समझ आ गया है,

हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी पेरिस में G7  में हिस्सा लेने के लिए जब पहुंचे थे तो वहां उनकी मुलाकात अपने अमेरिकी दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प से की. ट्रम्प से हुई पीएम की इस मुलाकात में पीएम ने पूरी बातचीत हिंदी में की जब एक देश का नेता ग्लोबल लेवल पर हिंदी भाषा को इस तरह से पहचान दिलाता है तो उसकी अहमियत  और भी बेहतर दंग से सबको समझ आती है, पीएम में अपनी मुलाकात में उन्होने अंग्रेजी को भी अहमियत दी पर अपनी मात्र भाषा को उन्होंने सबसे ऊपर प्राथमिकता दी.

पर इतना अपना पन पाने के बाद भी आज हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा बनने के स्तर को छू भी नहीं पाई, वह केवल राज काज की भाषा बनकर ही रह गई है , सरकारी मंत्रालयों, स्कूलों व  कॉलेजों आदि में इसके प्रोत्साहन के लिए बस हिंदी सप्ताह मना लिया जाता है, पर जब राष्ट्र भाषा का गौरव बनने की बात आती है. देश की आवाज में एक सुर की कमी छलक जाती है, और हिंदी फिर टक टकी लगाएं हास्यास्पद सी खडी रहती है.

अगर हमे हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाना हैं तो पूरे हिन्दुस्तान को एक होकर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए राजी होना होगा जिससे उससे संविधान में यह स्थान मिल जाएं. तो चलिए आज एक लहर की शुरुआत करें अपनी मातृभाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए. जय हिन्द जय हिंदी.

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