खबरदार! क्या आप हो रहे अस्थायी बेहोशी (सिनकोप) के शिकार

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कभी कभी अचानक आई बेहोशी के कारण आपको कमजोरी होने गर्मी ज्यादा लगने का अहसास होने लगता है , जिसके कारण आप को कभी कभी अचानक अपनी कुर्सी से उठकर हल्के चक्कर आने का एहसास होता है. जिसे आप कमजोरी मान लेते है पर यह कमजोरी नहीं है यह आपके लिए एक अनसुनी आहट है जो सिनकोप यानि अस्थायी बेहोशी के रुप में आपके शरीर में अपना घर बना रही है.

  • सिनकोप क्या होता है

बेहोश होने को चिकित्सकीय भाषा में सिनकोप कहा जाता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन सिनकोप को अस्थायी बेहोशी कहते है जो मस्तिष्क में खून का प्रवाह अपर्याप्त होने से होता है, ऐसा तब होता है,जब हृदय मस्तिष्क को पर्याप्त आक्सीजन पंप करना छोड़ देता है.

  • कैसे होता है सिनकोप

इसके शुरुआत में अलग कारणों जैसे पसीना आना, गर्मी लगना, शरीर में पानी कम होना (डीहाइड्रेशन), थकान या शरीर की स्थिति बदलने पर पैरों में खून जमा हो जाने से भी ऐसा होता है. वैसे तो किसी भी आयु का व्यक्ति सिनकोप का शिकार हो सकता है पर 60 साल से ऊपर के लोगों में यह ज्यादा आम है. ऐसे लोगों में इससे मौत का जोखिम भी ज्यादा होता है. कोरोनरी आर्टरी डिजीज, कन्जेनिटल हार्ट डिफेक्ट्स , वेंट्रीकुलर डिसफंक्शन, हार्ट अटैक झेल चुके और जेनेटिक म्युटेशन वाले लोगों को यह जोखिम ज्यादा हो सकता है.

  • कैसे होता है इसका इलाज

बेहोशी की जांच का सामान्य तरीका है इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (ईसीजी).इसमें खून में शुगर का स्तर और ब्लड काउंट की भी निगरानी की जा सकती है. नतीजों के आधार पर समस्या की गंभीरता का आकलन करने के लिए और व्यापक कार्डियक आकलन की आवश्यकता हो सकती है

  • कैसे रहे इससे जागरुक

कुछ समय के लिए बेहोश हो जाने के मामले अक्सर होते रहते हैं, लेकिन परेशानी तब खड़ी होती है, जब हम इसे मिर्गी मानकर न्यूरोलॉजिस्ट के पास चले जाते है. दरअसल, सही सूचना, जागरूकता का अभाव बेहोशी की समस्या के प्रमुख कारण हैं. आपको पता होना चाहिए कि बेहोशी का कारण दिल की धड़कन की अनियमित स्थिति होती है और इसलिए न्यूरोलॉजिस्ट के पास न जाकर आपको हृदयरोग विशेषज्ञ के पास जाना जरूरी है. अनियिमत धड़कन की स्थिति जब बहुत धीमी होती है तो पीड़ित चल-फिर नहीं पाता और बेहोश हो जाता है। वहीं तेज धड़कन की स्थिति में उसकी जान भी खतरे में पड़ सकती है।

  • हृदय रोगी हो जाएं सचेत

वैसे तो सिनकोप (बेहोशी की स्थिति) के अधिकांश शिकार साठ साल से अधिक उम्र के लोग हैं. हालांकि कम उम्र के लोगों और यहां तक कि बच्चों में भी बेहोशी की समस्या उत्पन्न हो सकती है,पर जो लोग कोरोनरी आर्टरी डिजीज, कॉनजेनाइटल हार्ट डिफेक्ट्स, वेंट्रीकुलर डिसफंक्शन के साथ हार्ट अटैक झेल चुके हैं, उन्हें जोखिम ज्यादा हो सकता है। दरअसल, सिनकोप की वजह से अचानक दिल का दौरा पड़ सकता है। अगर दिल की धड़कन की असामान्य स्थिति(एरिथिमिया) का उपचार समय पर नहीं किया जाए तो यह बेहद घातक हो सकता है।

  • कैसे होती है जांच

बेहोशी की जांच का सामान्य तरीका है इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (ईसीजी)। खून में शुगर का स्तर और ब्लड काउंट की भी निगरानी की जा सकती है। नतीजों के आधार पर समस्या की गंभीरता का आकलन करने के लिए और व्यापक कार्डियक आकलन की आवश्यकता हो सकती है।

  • इलाज के बारे में

जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से भी इसका इलाज किया जाता है. हालांकि यह सब चिकित्सकीय स्थिति की गंभीरता पर निर्भर है. सिनकोप का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि इसका कारण क्या है. ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है कि बेहोशी होने पर किस तरह के डॉक्टर के पास जाना चाहिए. आमतौर पर लोग शीघ्र ही न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करते हैं. यदि अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं मिले तो आप फिजीशियन से भी मिल सकते हैं. वैसे बेहोशी का सटीक इलाज कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट के पास होता है. वे ईसीजी कर इलाज के बारे में परामर्श देते हैं. वे पेसमेकर लगाकर पेसमेकर से आपकी धीमी हृदय गति को नियमित करते हैं.

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

यदि आप खूब पानी पीते हैं, तो आप बेहोशी का खतरा टाल सकते हैं. अधिकतर लोग चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, ग्रीन टी आदि पीकर बॉडी डिहाइड्रेट(शरीर में पानी की कमी) कर लेते हैं. यदि आप अधिक पानी नहीं पी सकते हैं तो चाय-कॉफी और विभिन्न कोल्ड ड्रिंक्स पीने के स्थान पर नींबू पानी, छाछ, लस्सी आदि लें ताकि बॉडी को हाइड्रेट रख सकें.

  • जागरूकता ही बचाव

बेहोशी के मामलों में सबसे अधिक जरूरी है यह जानना कि इस परेशानी को बड़ी बीमारी या बड़ा खतरा बनने से कैसे रोका जाए. याद रहे, बेहोशी दो तरह की होती है. पहली, जो हृदय रोगी नहीं हैं, उन्हें यह समस्या हो सकती है. दूसरे वे जो हृदय रोगी हैं. हृदय रोगियों को बेहोशी से बड़ा खतरा हो सकता है. इसलिए यदि आपको पता है कि आप दिल के मरीज हैं और आप बेहोशी हो चुके हैं, तो इसे गंभीरता से लें. यदि आपको भीड़ या किसी का ब्लड सैंपल लेते देखकर ही बेहोशी आ जाती है तो इस तरह की स्थितियों या माहौल से बचें. डायबिटीज के मरीजों को हृदयरोग के बारे में सतर्क रहना चाहिए.

 

 

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