राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में लगी इस्तीफों की झड़ी

Jyotiraditya Scindia, Jyotiraditya Scindia quits, Jyotiraditya Scindia resigns, Congress general secretary, General Secretary of AICC, Jyotiraditya Scindia resigns as General Secretary of AICC, All India Congress Committe,politics,national,Milind Deora resign from post, Congress, Resign From Congress, Youth Congress president resign from congress, Keshav Chand Yadav resign, Responsibility of the partys defeat Rahul Gandhi, Congress defeat in Election, इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, केशव चंद यादव

लोकसभा चुनाव में करारी  हार का मुंह देखने के बाद कांग्रेस पार्टी में लगातार इस्तीफों का दौर जारी है, चुनावों  में हार की जिम्मेदारी लेते हुए सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे की बात कहीं थी जिसे लेकर पार्टी में काफी घमासान देखने को मिला था. पार्टी के वरिष्ठ नेतागण राहुल को मनाने में जुटे हुए थे पर आखिरकार राहुल की जिद के आगे पार्टी को घुटने टेकने पड़े.

शुक्रवार को राहुल गांधी ने अपने अधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक ओपने लेटर लिख कर पार्टी को अपनी मंशा जाहिर करते हुए पार्टी को अपने इस्तीफा सौंपा . जिसके बाद से मोतीलाल वोहरा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया.

राहुल के इस्तीफे के बाद जैसे  कांग्रेस की नैया डूबती हुई सी दिख रही है, क्योंकि पार्टी को राहुल के नेतृत्व पर जो विश्वास था वे उनके इस्तीफा देने के बाद से डगमगाता हुआ दिखाई दिया जिसके बाद से पार्टी में इस्तीफे की छड़ी सी लग गई है,

इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अब मिलिंद देवड़ा ने मुंबई कांग्रेस अध्‍यक्ष के पद से और कांग्रेस के युवा चेहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महासचिव पद से इस्‍तीफा दे दिया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर कहा कि जनादेश को स्‍वीकार करते हुए मैं हार की जिम्‍मेदारी लेता हूं. मैंने कांग्रेस के महासचिव पद का अपना इस्‍तीफा राहुल गांधी को सौंप दिया है. मैं उन्हें इस जिम्मेदारी को सौंपने के लिए और मुझे अपनी पार्टी की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद देता हूं.

राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस पार्टी में इस्तीफों का दौर जारी है. सिंधिया का इस्तीफा भी इसी कड़ी में है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पहले ही पीसीसी चीफ के पद से इस्तीफा दे चुके हैं.

जिसके बाद यह साफ दिखाई दे रहा है कि कांग्रेस मझधार में आकर फंस गई है. अब देखना है कि  1945 से  देश में लगभग हर बार सरकार बनाने वाली कांग्रेस क्या इस काले साय़े से पार्टी को महफूज कर पाएंगी. क्या मोती लाल वोहरा जैसे वरिष्ठ नेता के नेतृत्व में मृत होती कांग्रेस को संजीवनी मिल पाएंगी या नहीं

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help