चंद्रयान-2 चांद के फलक से दूरी बनी पर हौसला अभी बाकी है

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2 किलोमीटर का सफर तय करने में आज हमें जरा भी मेहनत नहीं करनी पड़ती है. इस सफर की दूरी को हम कुछ ही मिनटों में पूरा कर लेते है पर कभी कभी यह दूरी हमें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए काफी लंबी साबित होने लगती है, ऐसा ही शुक्रवार को बेंगलुरु के इसरों के अनुसंधान केंद्र में देखने को मिला.

यहां लगभग 2.1 किलोमीटर की दूरी से दूर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए प्रयास कर रहें चंद्रयान-2 का संपर्क मिशन को संभालने वाली टीम से अचानक टूट गया, जिसके बाद से इसरों के लगभग 1.17 महीने से शुरु हुआ  यह चंद्रयान 2 मिशन भारत के इतिहास में दर्ज हो कर  भी अपनी एक नई इबारत नहीं लिख पाया.

उल्लेखनीय है कि इसरों ने इस मिशन की तैयारी में लगभग 11 साल  दिए थे, जिसके बाद 7 सितंबर 2019 को करीब 1बजकर 54 मिनट पर विक्रम लैंडर का संपर्क  कंट्रोल रूम से  टूट चूका था, जिसके बाद से यह मिशन  चांद पर देश का तिरंगा फहराने से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी से रह गया.

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ के उतरने की सारी प्रक्रिया सामान्य थी. 35 किमी ऊपर से सतह पर उतरने की प्रक्रिया का काउंटडाउन 1:38 बजे शुरू हुआ. 13 मिनट 48 सेकंड तक सब कुछ सही चला. तालियां भी गूंजी, मगर आखिरी के डेढ़ मिनट पहले जब विक्रम 2.1 किमी ऊपर था, तभी करीब 1:55 बजे उसका इसरो से संपर्क टूट गया.

यह स्थिति करीब 12 मिनट तक बनी रही. करीब 2:07 बजे वैज्ञानिकों ने बताया कि संपर्क बहाल करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, 2.18 बजे इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया, विक्रम से संपर्क टूट गया है. हम आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं. वहीं मिशन की सारी गतिविधियों को करीब से देख रहे देश के  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  इसरो के  अविश्नीय कार्य के लिए हौसला बढ़ाते हुए  इसरो के  प्रमुख सिवन और उनकी टीम का हौसला बढ़ाते हुए कहा, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. हिम्मत रखिए. मैं आपके साथ हूं देश आपके साथ ,आप पर और गपकी टीम पर देश के 130 करोंड़ भारतीयों को गर्व है,

फिलहाल इसरों की टीम अभी भी लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करने की कवायदें कर रहीं है ताकि चांद के फलक पर हमारे कदमों के निशां और लहराता तिरंगा देखने का 130 करोड़ हिंदुस्तानियों का जो सपना शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात चांद की दहलीज तक पहुंच गया वह जल्द पूरा हो सके.

 

 

 

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