क्यों करते हैं सरस्वती पूजा जाने पूजन का शुभ मुहूर्त एवं विधि

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वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की यह लाइने हमें अंधरे से उजाले की रोशनी के बीच ले जाती है ताकि हम अज्ञानता के अंधेरे से दूर उजाले की अहमियत समझ सके.
इसी अंधेरे (अज्ञानता) से रोशनी के बीच के सफर को जीने के लिए व ज्ञान के प्रकाश की अहमियत समझने के लिए बसंत पंजमी यानी सरस्वती पूजन किया जाता है, ताकि विधा की देवी से हम ज्ञान रुपी भंडार को अपने जीवन में समाहित कर सके.

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा के दिन के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति ने मनुष्य के जीवन में प्रवेश किया था.
पुराणों में लिखा है सृष्टि को वाणी देने के लिए ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का था. इस जल से हाथ में वीणा धारण कर जो शक्ति प्रकट हुई वह सरस्वती देवी कहलाई. उनके वीणा का तार छेड़ते ही तीनों लोकों में ऊर्जा का संचार हुआ और सबके शब्दों में वाणी मिल गई. वह दिन बसंत पंचमी का दिन था इसलिए बसंत पंचमी को सरस्वती देवी का दिन भी माना जाता है.
शास्त्रों में बसंत पंचमी के दिन कई नियम बनाए गए हैं, जिसका पालन करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं. बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए और मां सरस्वती की पीले और सफेद रंग के फूलों से ही पूजा करनी चाहिए.

बसंत पंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त-
बसंत पंचमी की पूजा का मुहूर्त: सुबह 7.15 बजे से दोपहर 12.52 बजे तक.
पंचमी तिथि प्रारंभ: माघ शुक्ल पंचमी शनिवार 9 फरवरी की दोपहर 12.25 बजे से शुरू.
पंचमी तिथि समाप्त: रविवार 10 फरवरी को दोपहर 2.08 बजे तक.

मां सरस्वती की पूजा विधि-
– सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें.
– मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में रखें.
– मां सरस्वती को सफेद चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें.
– उनका ध्यान कर ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें.
– मां सरस्वती की आरती करें और दूध, दही, तुलसी, शहद मिलाकर पंचामृत का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाएं.

मां सरस्वती को कैसे करें प्रसन्न-
– माता सरस्वती को पीले फल, मालपुए और खीर का भोग लगाएं
– बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को बेसन के लड्डू अथवा बेसन की बर्फी, बूंदी के लड्डू अथवा बूंदी का प्रशाद चढ़ाएं.
– श्रेष्ठ सफलता प्राप्ति के लिए देवी सरस्वती पर हल्दी चढ़ाकर उस हल्दी से अपनी पुस्तक पर “ऐं” लिखें.
– बसंत पंचमी के दिन कटु वाणी से मुक्ति हेतु, वाणी में मधुरता लाने के लिए देवी सरस्वती पर चढ़ी शहद को नित्य प्रात: सबसे पहले थोड़ा से अवश्य चखें.
– बसंत पंचमी के दिन गहनें, कपड़ें, वाहन आदि की खरीदारी आदि भी अति शुभ मानी जाती है.

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