मध्यस्थता का रास्ता निकाले वरना रोजाना होगी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की सुनवाईः सुप्रीम कोर्ट

Ayodhya Ram Janmabhoomi controversy, demand for hearing soon, Supreme court, अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद, जल्द सुनवाई की मांग, संविधान पीठ, सुप्रीम कोर्ट

साल 1992 से छिड़े राम जन्मभूमि विवाद निपटाने की भरसक कोशिश की  रही है पर  राजनीतिक रंग लेने के बाद यह मामला 27 साल से लटका चला रहा है, जिसे लेकर  उच्चतम न्यायालय ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद अयोध्या भूमि विवाद मामले में जारी मध्यस्थता प्रक्रिया के संबंध में गुरुवार को एक सप्ताह के अंदर नई स्थिति की रिपोर्ट मांगी और स्पष्ट किया कि अगर यह विवादित मामला मैत्रीपूर्ण तरीके से हल नहीं हुआ तो वह 25 जुलाई से दिन-प्रतिदिन आधार पर इसकी सुनवाई करेगा.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला से 18 जुलाई तक स्थिति रिपोर्ट सौंप देने का अनुरोध किया. साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि वह अगला आदेश भी 18 जुलाई को ही देगा. तब इस पर मध्यस्थता का रास्ता निकालने की भी बात की जा रही है.

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष हैं.

संविधान पीठ ने कहा कि नई स्थिति रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अगर उन्हें लगेगा कि मध्यस्थता प्रक्रिया विफल रही तब मुख्य अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई न्यायालय 25 जुलाई से दिन प्रतिदिन के आधार पर करेगा.

पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं.

पीठ ने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला से यह अनुरोध करना उचित है कि वह अभी तक की मध्यस्थता प्रक्रिया के बारे में हमें सूचित करें और साथ ही यह भी बताएं कि प्रकिया अभी किस स्तर पर है.’’

पीठ ने कहा, ‘‘न्यायाधीश कलीफुल्ला अगले गुरुवार तक यह रिपोर्ट सौंपेंगे. इसी दिन अगला आदेश पारित किया जाएगा.’’

उच्चतम न्यायालय ने एक मूल वादी के कानूनी उत्तराधिकारी गोपाल सिंह विशारद की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में विवाद पर न्यायिक फैसला देने और मौजूदा मध्यस्थता प्रक्रिया को बंद करने का अनुरोध किया गया. इसमें आरोप लगाया गया है कि मध्यस्थता प्रक्रिया में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा है.

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