जलियांवाला बाग की घटना के चलते हुए अपराध के लिए मुझे खेद हैः धार्मिक गुरु के कैंटरबरी के आर्चबिशप वेल्बी

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास एक छोटा बाग, जिसे साल 1919 से पहले सिर्फ अमृतसर या फिर उससे सटे जिले ही जानते होंगे पर 13 अप्रैल 1919  को   जलियावाला बाग में अँग्रेज़ी हुकूमत के ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था , इनका गुनाह सिर्फ इतना था कि वह  बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ में अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों व दो नेताओं सत्यपाल और सैफ़ुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में व मेलों की रौनक देखने आए थे. जिनपर ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर ने  10 मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई व लोगों को बचने का कोई मौका नहीं दिया.

इसी घटना को आज 100 साल पूरे होने पर जलियाँवाला स्थित शहीदी स्मारक पर मंगलवार दोपहर एक अंग्रेज पादरी ने जमीन पर लेटकर शहीदों को नमन किया. उन्होंने कहा, ‘‘आपको याद है कि उन्होंने क्या किया था, यह स्मृति जीवित रहेगी. यहां होने वाले अपराध के लिए मुझे खेद है. एक धार्मिक नेता के रूप में मैं इस दुखद घटना पर शोक प्रकट करता हूं.’’

दरअसल, इंग्लैंड के कैंटरबरी के आर्चबिशप वेल्बी भारत भ्रमण पर आए हुए हैं. इस दौरान वह अमृतसर भी पहुंचे. उन्होंने 1919 में बैसाखी वाले दिन अंग्रेज हुकूमत के जनरल माइकल ओ‘डायर के आदेश पर किए गए नरसंहार की घटना पर असंतोष जताया.

बता दें कि कैंटरबरी के आर्चबिशप वेल्बी से पहले भी 1998 में महारानी एलिजाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी. 2013 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे. और वहां कि  विजिटर्स बुक में उन्होनें लिखा कि “ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी.

 

 

 

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help